कालसर्प दोष क्या होता है — और उज्जैन में पूजा कैसे होती है
उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा करानी हो तो पंडित जी से सीधे बात करें। कुंडली देखकर बताया जाता है कि कौन सी विधि उपयुक्त है, कितना समय लगेगा और कौन सी सामग्री आपको लानी है। दक्षिणा कॉल पर ही तय होती है — कोई छुपा हुआ शुल्क नहीं।
📞 +91 89895 40544पूजा कब करवानी है और कितनी दक्षिणा लगेगी — बुकिंग और दक्षिणा की जानकारी। नीचे पढ़ें कि यह दोष बनता कैसे है और इसके 12 प्रकार कौन से हैं।
पूजा कैसे होती है — 3 आसान चरण
- 1 कॉल करें
पंडित जी से सीधे बात करें और अपनी कुंडली की जानकारी दें।
- 2 विधि व दक्षिणा तय होती है
कुंडली देखकर उपयुक्त विधि, समय, सामग्री और दक्षिणा कॉल पर ही बता दी जाती है — कोई छुपा हुआ शुल्क नहीं।
- 3 शुभ तिथि पर पूजा
शिप्रा तट व पूजा स्थल पर विधिवत अनुष्ठान। यदि आप न आ पाएं तो संकल्प आपके नाम व गोत्र से किया जाता है।
कालसर्प दोष कैसे बनता है
राहु और केतु किसी भी कुंडली में सदैव एक-दूसरे के ठीक सामने, 180 अंश पर स्थित होते हैं। इस कारण वे कुंडली को दो भागों में बाँट देते हैं। यदि सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि — ये सातों ग्रह इनमें से एक ही ओर आ जाएँ, तो कालसर्प योग बनता है।
इसीलिए यह तय करना कि किसी कुंडली में यह योग है या नहीं, केवल जन्म तिथि से संभव नहीं है। इसके लिए जन्म समय और जन्म स्थान के साथ पूरी कुंडली देखनी पड़ती है।
कालसर्प दोष के 12 प्रकार
राहु और केतु किन भावों में बैठे हैं, इसी आधार पर शास्त्रों में इस योग के बारह प्रकार बताए गए हैं। प्रत्येक प्रकार का नाम एक नाग के नाम पर है।
| # | नाम | Name | राहु — केतु भाव |
|---|---|---|---|
| 1 | अनंत कालसर्प | Anant | लग्न — सप्तम |
| 2 | कुलिक कालसर्प | Kulik | द्वितीय — अष्टम |
| 3 | वासुकि कालसर्प | Vasuki | तृतीय — नवम |
| 4 | शंखपाल कालसर्प | Shankhpal | चतुर्थ — दशम |
| 5 | पद्म कालसर्प | Padma | पंचम — एकादश |
| 6 | महापद्म कालसर्प | Mahapadma | षष्ठ — द्वादश |
| 7 | तक्षक कालसर्प | Takshak | सप्तम — लग्न |
| 8 | कर्कोटक कालसर्प | Karkotak | अष्टम — द्वितीय |
| 9 | शंखचूड़ कालसर्प | Shankhachud | नवम — तृतीय |
| 10 | घातक कालसर्प | Ghatak | दशम — चतुर्थ |
| 11 | विषधर कालसर्प | Vishdhar | एकादश — पंचम |
| 12 | शेषनाग कालसर्प | Sheshnag | द्वादश — षष्ठ |
कर्कोटक कालसर्प दोष पर विस्तृत लेख — कर्कोटक कालसर्प दोष के लक्षण और उपाय।
कालसर्प दोष के लक्षण क्या माने जाते हैं
शास्त्रों में इस योग के साथ जिन स्थितियों का उल्लेख मिलता है, वे ये हैं। ये लक्षण अकेले किसी दोष का प्रमाण नहीं हैं — निर्णय कुंडली देखकर ही होता है।
- बार-बार आने वाली रुकावटें और अधूरे रह जाते काम
- विवाह या संबंधों में देरी
- व्यवसाय और नौकरी में अस्थिरता
- मानसिक बेचैनी और अशांति
- सपनों में सर्प दिखाई देना
- परिश्रम के अनुपात में फल न मिलना
शांति के लिए शास्त्रों में क्या बताया गया है
कालसर्प दोष निवारण पूजा, रुद्राभिषेक, नाग-नागिन के जोड़े का पूजन और महामृत्युंजय जाप — शास्त्रों में इस योग की शांति के लिए ये अनुष्ठान बताए गए हैं। इनमें से कौन सा उपयुक्त है, यह दोष के प्रकार और कुंडली की ग्रह स्थिति देखकर तय किया जाता है।
तिथि की दृष्टि से नागपंचमी, अमावस्या और पंचमी उपयुक्त मानी जाती हैं। पूजा किसी भी योग्य पंडित जी से, पूरी विधि के साथ करवाई जानी चाहिए।
उज्जैन में यह पूजा क्यों की जाती है
उज्जैन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की नगरी है। यहीं नागचंद्रेश्वर मंदिर स्थित है, जो वर्ष में केवल एक दिन — नागपंचमी पर — खुलता है। इसी कारण यहाँ कालसर्प दोष शांति के अनुष्ठान की लंबी परंपरा रही है।
अपनी कुंडली में यह योग है या नहीं, और कौन सी पूजा उपयुक्त है — यह जानने के लिए पूजा की बुकिंग और दक्षिणा की जानकारी देखें, या सीधे पंडित जी से बात करें।
तिथि देखनी हो तो उज्जैन की अगली अमावस्या और पूर्णिमा तिथियाँ यहाँ दी गई हैं — प्रारंभ और समाप्ति समय के साथ।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कालसर्प दोष क्या होता है?
जब जन्म कुंडली के सभी सात ग्रह राहु और केतु के बीच के भागों में आ जाते हैं, तो उस स्थिति को कालसर्प दोष या कालसर्प योग कहा जाता है। राहु और केतु दोनों छाया ग्रह हैं और कुंडली में सदैव आमने-सामने 180 अंश पर रहते हैं।
कालसर्प दोष कैसे बनता है?
राहु और केतु कुंडली को दो भागों में बाँट देते हैं। यदि शेष सभी ग्रह इनमें से एक ही ओर आ जाएँ तो कालसर्प योग बनता है। यदि एक भी ग्रह इस अर्धभाग से बाहर हो, तो शास्त्रों के अनुसार यह योग नहीं बनता।
कालसर्प दोष कितने प्रकार का होता है?
राहु और केतु किन भावों में स्थित हैं, इसके आधार पर शास्त्रों में कालसर्प दोष के बारह प्रकार बताए गए हैं — अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग।
क्या कालसर्प दोष सबकी कुंडली में होता है?
नहीं। यह योग तभी बनता है जब सभी ग्रह राहु–केतु के एक ही ओर हों। बहुत सी कुंडलियों में एक या अधिक ग्रह इस अर्धभाग से बाहर होते हैं, ऐसी स्थिति में यह योग नहीं माना जाता। इसीलिए कुंडली देखे बिना यह तय नहीं किया जा सकता।
कालसर्प दोष की शांति के लिए क्या किया जाता है?
शास्त्रों में इसके लिए कालसर्प दोष निवारण पूजा, रुद्राभिषेक, नाग-नागिन जोड़े का पूजन और महामृत्युंजय जाप बताए गए हैं। कौन सी विधि उपयुक्त है, यह कुंडली में दोष के प्रकार और ग्रह स्थिति देखकर तय किया जाता है।
कालसर्प दोष पूजा के लिए कौन सी तिथि उपयुक्त मानी जाती है?
नागपंचमी, अमावस्या और पंचमी तिथि को इस पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है। सोमवार और शनिवार भी शुभ कहे गए हैं। सही मुहूर्त कुंडली और पंचांग दोनों देखकर तय किया जाता है।
उज्जैन में कालसर्प दोष पूजा क्यों की जाती है?
उज्जैन महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की नगरी है, और यहाँ नागचंद्रेश्वर मंदिर भी स्थित है जो वर्ष में केवल नागपंचमी पर खुलता है। इसी कारण यहाँ कालसर्प दोष शांति के अनुष्ठान की लंबी परंपरा रही है।
पूजा में कितना समय लगता है?
सामान्यतः विधि के अनुसार कुछ घंटों का समय लगता है। संकल्प, पूजन, जाप और हवन — प्रत्येक चरण की अवधि दोष के प्रकार और चुनी गई विधि पर निर्भर करती है। सटीक समय पंडित जी कुंडली देखने के बाद बताते हैं।
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